किसी दिन जब तुमसे बात नहीं होती,
कुछ अजब-सा लगता है
उस दिन का हर एक पल|
सुखें हुए गुलाब के पत्तो की तरहा
लगती है हर एक शाम,
और सुनसान-सा लगता है
जगमगाता सपनों का शहर ।
वो रात जो मुझे बेहद पसंद है
वो भी रुठ जाती है मुझसें
अजनबी समझकर ।
टुट जाते है सब
सपने शिशे की तरहा
जो पिछली रात
देखे थे मैंने |
रो पडता है तब दिल मेरा और,
बार बार चिल्लाकर मुझसे यही पुछता है,
क्यूँ आज बात नही हुई?
क्यूँ आज बात नही हुई?
© रंजिश....(के.प्रफुल्ल)
- 11/06/2018
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