Monday, 11 June 2018

क्यूँ आज बात नही हुई?

किसी दिन जब तुमसे बात नहीं होती,
कुछ अजब-सा लगता है
उस दिन का हर एक पल|

सुखें हुए गुलाब के पत्तो की तरहा
लगती है हर एक शाम,  
और  सुनसान-सा लगता है 
जगमगाता सपनों का शहर ।

वो रात जो मुझे बेहद पसंद है
वो भी रुठ जाती है मुझसें 
अजनबी समझकर  ।

टुट जाते है सब 
सपने शिशे की तरहा
जो  पिछली रात  
देखे थे मैंने |

रो पडता है तब दिल मेरा और,
बार बार चिल्लाकर मुझसे यही पुछता है,
क्यूँ आज बात नही हुई?
क्यूँ आज बात नही हुई?

                           © रंजिश....(के.प्रफुल्ल) 
                             - 11/06/2018